रविवार, 3 सितंबर 2017
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रविवार, 5 फ़रवरी 2017
रविवार, 4 दिसंबर 2016
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016
गुरुवार, 28 जनवरी 2016
ये हैं भारत की 8 रहस्यमय घटनाएं और थ्योरीज
1. क्या ताज महल का है दूसरा सच ?
ताज महल मुगल शासन की बेहतरीन उपलब्धि के तौर पर जाना जाता है। इसे प्यार का बेजोड़ प्रतीक भी कहते हैं। 17वीं सदी में शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में इसे बनवाया था। लेकिन साल 2007 में भारतीय लेखक और प्रोफेसर पुरुषोत्तम ओक ने दावा किया था कि ताज महल भगवान शिव का मंदिर हुआ करता था। उन्होंने अपने पक्ष में कई तथ्य भी रखे, लेकिन भारत सरकार ने उनके तथ्यों को खारिज कर दिया। हालांकि, कई लोगों ने उनके दावे को खतरनाक मानते हुए खारिज कर दिया ।
केंद्रीय मंत्री ने कहा- सबूत नहीं
दिसंबर 2015 में भारत के केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने भी कहा- 'सरकार को ताज महल के हिंदू मंदिर होने के दावे से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है।' दरअसल, आगरा के छह वकीलों ने भी पिछले साल याचिका दायर करते हुए कहा था कि ताज महल एक समय में हिंदुओं का शिव मंदिर था और इसे हिंदुओं को सौंप दिया जाना चाहिए।
दिसंबर 2015 में भारत के केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने भी कहा- 'सरकार को ताज महल के हिंदू मंदिर होने के दावे से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है।' दरअसल, आगरा के छह वकीलों ने भी पिछले साल याचिका दायर करते हुए कहा था कि ताज महल एक समय में हिंदुओं का शिव मंदिर था और इसे हिंदुओं को सौंप दिया जाना चाहिए।
2. मौत के बाद भी सैनिक कर रहा है देश की रक्षा ?
हिमालय क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के पास 'नाथुला पास' है। यहां 4 अक्टूबर 1968 को बाबा हरभजन सिंह नाम के सैनिक की मौत हो गई। बर्फ में आई दरार की वजह से वे नदी में गिर गए। तब उनकी उम्र सिर्फ 27 साल थी। 3 दिन बाद उनकी बॉडी नदी में 2 किलोमीटर दूर मिली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद वे साथी सैनिकों के सपनों में आए और सैनिकों से उस जगह पर पवित्र स्थल बनाने को कहा। सैनिकों ने सपने को सीरियसली लिया और वहां मेमोरियल का निर्माण कर दिया। स्थानीय लोग इस जगह को पवित्र मानते हैं।
हिमालय क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के पास 'नाथुला पास' है। यहां 4 अक्टूबर 1968 को बाबा हरभजन सिंह नाम के सैनिक की मौत हो गई। बर्फ में आई दरार की वजह से वे नदी में गिर गए। तब उनकी उम्र सिर्फ 27 साल थी। 3 दिन बाद उनकी बॉडी नदी में 2 किलोमीटर दूर मिली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद वे साथी सैनिकों के सपनों में आए और सैनिकों से उस जगह पर पवित्र स्थल बनाने को कहा। सैनिकों ने सपने को सीरियसली लिया और वहां मेमोरियल का निर्माण कर दिया। स्थानीय लोग इस जगह को पवित्र मानते हैं।
इतना ही नहीं, मौत के बाद भी भारतीय सेना में वे अपने पद पर बने रहे और उनका प्रमोशन भी होता रहा। भारतीय सैनिक ऐसा मानते रहे कि बाबा हरभजन उनकी रक्षा करते हैं। वहां होने वाली मीटिंग में भी उनके लिए एक खाली कुर्सी छोड़ दी जाती है। सैनिकों के मुताबिक, किसी भी अटैक से तीन दिन पहले बाबा उन्हें जानकारी दे देते हैं।
3. 1940 से बिना खाना और पानी के हैं जिंदा
गुजरात में रहने वाले प्रह्लाद माताजी नाम के साधु दावा करते हैं कि उन्होंने 1940 से न कुछ खाया है और न पिया है। 2010 में उनके ऊपर 3 कैमरे लगाए गए और 24 घंटे निगरानी रखी गई। लेकिन इसमें कुछ भी संदेहास्पद नहीं पाया गया। इससे कई लोग ये मानने लगे कि वे सिर्फ ऑक्सीजन और रोशनी से जिंदा हैं। हालांकि, उनके दावे को साइंटिफिक तौर पर अभी तक मान्यता नहीं मिली है।
4. महिला का हुआ पुनर्जन्म ?
शांति देवी का जन्म 1930 में एक खुशहाल परिवार में दिल्ली में हुआ था। हालांकि, वह ज्यादा समय तक खुश नहीं रह सकी। जब वह चार साल की थी, तब से जिद्द करने लगी कि उसके माता-पिता कोई और हैं। शांति देवी ने दावा किया कि एक बच्चे को जन्म देते समय उसकी मौत हो गई थी और अपने पति तथा परिवारजनों के बारे में काफी जानकारियां दी थी। शांति देवी के पिता ने उसके दावों के बारे में जब पता किया तो वे सारे सच निकले। एक महिला का नाम लुडगी देवी था और बच्चे को जन्म देते समय उसकी मौत हो गई थी। परिवार के लोगों को सबसे अधिक आश्चर्य तब हुआ जब शांति देवी ने समय और शहर का नाम एकदम सटीक बताया। जब वह अपने पूर्वजन्म के पति से मिली तो उसने उसे पहचान लिया और अपने बच्चे को मां की तरह प्यार करने लगी।
शांति देवी का जन्म 1930 में एक खुशहाल परिवार में दिल्ली में हुआ था। हालांकि, वह ज्यादा समय तक खुश नहीं रह सकी। जब वह चार साल की थी, तब से जिद्द करने लगी कि उसके माता-पिता कोई और हैं। शांति देवी ने दावा किया कि एक बच्चे को जन्म देते समय उसकी मौत हो गई थी और अपने पति तथा परिवारजनों के बारे में काफी जानकारियां दी थी। शांति देवी के पिता ने उसके दावों के बारे में जब पता किया तो वे सारे सच निकले। एक महिला का नाम लुडगी देवी था और बच्चे को जन्म देते समय उसकी मौत हो गई थी। परिवार के लोगों को सबसे अधिक आश्चर्य तब हुआ जब शांति देवी ने समय और शहर का नाम एकदम सटीक बताया। जब वह अपने पूर्वजन्म के पति से मिली तो उसने उसे पहचान लिया और अपने बच्चे को मां की तरह प्यार करने लगी।
5. सम्राट अशोक ने बनाई थी 9 लोगों की रहस्यमय सोसाइटी ?
इतिहास की रहस्यमय चीजों में सम्राट अशोक की 9 लोगों की एक सोसाइटी का जिक्र सामने आता है। इसे The nine unknown के नाम से भी जाना जाता है। सम्राट अशोक ने 273 ई.पू. में इस कथित शक्तिशाली लोगों की सोसाइटी की नींव रखी थी। इस सोसाइटी का निर्माण कलिंग के युद्ध में 1 लाख से अधिक लोगों की मौत के बाद हुआ था।
कहा जाता है कि इन 9 लोगों के पास ऐसी सूचनाएं थीं, जो गलत हाथों में जाने पर खतरनाक साबित हो सकती थीं। इनमें प्रोपेगैंडा सहित माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित किताबें थी। कुछ किताबों के बारे में कहा जाता है कि इनमें एंटी ग्रेविटी और टाइम ट्रैवल के गुप्त सिद्धांत दर्ज थे। ये 9 लोग विश्व के कई स्थानों में फैले थे। सबसे आश्चर्य की बात है कि इनमें से कई विदेशी भी थे।
6. 'श्रापित गांव' है कुलधारा ?
राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित है कुलधारा गांव। 500 वर्ष पहले कुलधारा गांव में 1,500 परिवार रहा करते थे। एक रात वे सभी गायब हो गए। लेकिन न तो इनके मारे जाने और न ही अपहरण होने की कोई जानकारी सामने आई। इस घटना के पीछे क्या कारण था, इसका पता आज तक नहीं लग सका। लोग इस बारे में कई तरह के किस्से-कहानियां सुनाते हैं। पुरानी किवदंती के अनुसार, कुछ लोगों ने इस गांव पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश की थी। यह गांव आज भी वीरान पड़ा है।
राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित है कुलधारा गांव। 500 वर्ष पहले कुलधारा गांव में 1,500 परिवार रहा करते थे। एक रात वे सभी गायब हो गए। लेकिन न तो इनके मारे जाने और न ही अपहरण होने की कोई जानकारी सामने आई। इस घटना के पीछे क्या कारण था, इसका पता आज तक नहीं लग सका। लोग इस बारे में कई तरह के किस्से-कहानियां सुनाते हैं। पुरानी किवदंती के अनुसार, कुछ लोगों ने इस गांव पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश की थी। यह गांव आज भी वीरान पड़ा है।
7. जोधपुर के आकाश में हुआ तेज धमाका ?
18 दिसंबर, 2012 को जोधपुर के आकाश में एक अनोखी घटना घटी। जोधपुर के आकाश में एयरप्लेन क्रैश करने जैसी आवाज सुनाई दी। ऐसे लग रहा था जैसे कि कोई भयानक विस्फोट हुआ हो। लोग इस तेज आवाज से काफी परेशान हो गए थे। बाद में यह साफ हो गया कि जोधपुर के आकाश में कोई प्लेन उड़ नहीं रहा था और न ही कोई विस्फोट हुआ था। जोधपुर में हुई घटना की चर्चा दुनिया के कई देशों में हुई थी।
18 दिसंबर, 2012 को जोधपुर के आकाश में एक अनोखी घटना घटी। जोधपुर के आकाश में एयरप्लेन क्रैश करने जैसी आवाज सुनाई दी। ऐसे लग रहा था जैसे कि कोई भयानक विस्फोट हुआ हो। लोग इस तेज आवाज से काफी परेशान हो गए थे। बाद में यह साफ हो गया कि जोधपुर के आकाश में कोई प्लेन उड़ नहीं रहा था और न ही कोई विस्फोट हुआ था। जोधपुर में हुई घटना की चर्चा दुनिया के कई देशों में हुई थी।
8. लद्दाख का द कोंग्का ला दर्रा में दिखा यूएफओ?
लद्दाख का द कोंग्का ला दर्रा दुनिया के उन इलाकों में है, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी मिल पाई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है- हिमालय का यह क्षेत्र बर्फीला और दुर्गम है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का दावा है कि यहां यूएफओ का दिखाई देना आम बात है। इन बातों को पहले अधिक महत्व नहीं दिया गया, लेकिन जून 2006 में गूगल के सैटेलाइट से ली गई फोटो भी सामने आई जिसने लोगों को चौंका दिया।
यह भारत और चीन की सीमा पर पड़ता है। यह दोनों देशों के बीच सैन्य-विवाद का विषय बन चुका है। यह नो-मैन्स लैंड घोषित है। दोनों देश इस पर नजर रखते हैं, लेकिन कोई भी देश इस क्षेत्र में पैट्रोलिंग नहीं करता है।
लद्दाख का द कोंग्का ला दर्रा दुनिया के उन इलाकों में है, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी मिल पाई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है- हिमालय का यह क्षेत्र बर्फीला और दुर्गम है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का दावा है कि यहां यूएफओ का दिखाई देना आम बात है। इन बातों को पहले अधिक महत्व नहीं दिया गया, लेकिन जून 2006 में गूगल के सैटेलाइट से ली गई फोटो भी सामने आई जिसने लोगों को चौंका दिया।
यह भारत और चीन की सीमा पर पड़ता है। यह दोनों देशों के बीच सैन्य-विवाद का विषय बन चुका है। यह नो-मैन्स लैंड घोषित है। दोनों देश इस पर नजर रखते हैं, लेकिन कोई भी देश इस क्षेत्र में पैट्रोलिंग नहीं करता है।
गुरुवार, 14 जनवरी 2016
इन 10 बातों को ज्यादातर लोग मानते हैं सच, लेकिन हैं Fake
इतिहास खुद में अच्छी-बुरी, दोनों तरह की यादें समेटे हुए हैं। इनमें
कुछ तस्वीरें हैं जिन्हें गुज़रे वक्त का गवाह बताया जाता है, तो कई बातें
भी हैं जिनकी सच्चाई कम ही लोगों को पता है। इस वजह से ज्यादातर भारतीय
इतिहास की उन Fake बातों को भी सच मान बैठे हैं, जो या तो कुछ लोगों ने
जानबूझकर फैलाई है या फिर उसकी सच्चाई लोगों को पता ही नहीं हैं।
1- ये गांधीजी नहीं हैं-
Dancing Gandhi कही जाने वाली इस तस्वीर में महात्मा गांधी को विदेशी महिला संग डांस करते हुए दिखाया गया है।
असलियत- यह गांधीजी नहीं, उनकी तरह ड्रेसअप ऑस्ट्रेलियन आर्टिस्ट था, जो एक पार्टी में ब्रिटिश महिला के साथ डांस कर रहा है। 1946 का यह फोटो भी सिडनी में आयोजित एक चैरिटी इवेंट का है। इतना ही नहीं, फोटो ध्यान से देखने पर आप पाएंगे कि जिस तरह एक्टर ने धोती बांधी है, वैसे गांधीजी ने कभी नहीं पहनी और न ही वे ऐसी सैंडल कभी पहनते थे। चश्मा भी गांधीजी का नहीं है।
2- गांधी ने ऐसा कभी नहीं कहा
'नज़र के ऊपर नज़र रखना कुछ नहीं, विश्व को अंधा कर देगा', एक-दूसरे की जासूसी पर निशाना साधता यह कमेंट गांधी जी का बताया जाता है, लेकिन उनका है नहीं।
असलियत- गांधी जी की पूरी लाइफ-हिस्ट्री में इसका कोई सबूत मौजूद नहीं कि यह गांधी जी ने कहा था। असल में यह डायलॉग है जो फिल्म गांधी में उनका किरदार निभाने वाले बेन किंग्सले ने कहा था।
3- इंडिया फीफा वर्ल्डकप 1950 से बाहर हुआ क्योंकि...
1950 फीफा वर्ल्डकप में इंडिया तब शामिल हुआ था, जब 4 टीमों ने अपने
नाम वापस ले लिए थे। बताया गया कि इंडिया को इसलिए बाहर कर दिया गया
क्योंकि हमारे खिलाड़ी नंगे पैर खेलना चाहते थे।
असलियतः ब्राज़ील में हुए इस इवेंट में हिस्सा लेना काफी
महंगा पड़ रहा था और AIFF (ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन) को लगता था कि इंडिया
के जीतने की संभावनाएं काफी कम हैं, इसलिए बेइज्जती से बचने के लिए (ऐसा
कहा जाता है) यह प्रचारित किया गया।
4- मिल्खा ने पीछे देखा और हार गए
फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह से हमेशा एक सवाल पूछा जाता रहा है कि आखिर 1960 के रोम ओलंपिक के फाइनल में 400 मीटर की दौड़ में सबसे आगे होने के बाद भी उन्होंने पीछे मुड़कर क्यों देखा? कहा जाता है कि मिल्खा ने पीछे देखा और हार गए, जबकि ये सच नहीं है।
फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह से हमेशा एक सवाल पूछा जाता रहा है कि आखिर 1960 के रोम ओलंपिक के फाइनल में 400 मीटर की दौड़ में सबसे आगे होने के बाद भी उन्होंने पीछे मुड़कर क्यों देखा? कहा जाता है कि मिल्खा ने पीछे देखा और हार गए, जबकि ये सच नहीं है।
असलियतः मिल्खा रेस में शुरू से चौथे नंबर पर थे और अंत
में भी चौथे स्थान पर ही आए। पीछे मुड़कर देखने से हार-जीत का तर्क सच नहीं
है। यू-ट्यूब पर रोम ओलंपिक में मिल्खा के ढेरों वीडियो मौजूद हैं जिसमें
देखा जा सकता है कि सच क्या था।
5-हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है?
हॉकी को हमेशा स्कूल की किताबों में भारत का राष्ट्रीय खेल बताया गया, जबकि ये सच नहीं है।
असलियतः दरअसल, देश का कोई राष्ट्रीय खेल घोषित ही नहीं किया गया है। एक आरटीआई के जवाब में खेल मंत्रालय यह साफ कर चुका है।
6- रेलवे नहीं है दुनिया का सबसे बड़ा इम्प्लाई बेस
तकरीबन 16 लाख कर्मचारियों वाली इंडियन रेलवे को दुनिया में सबसे ज्यादा नौकरी देने वाला संगठन माना जाता है, जबकि ऐसा है नहीं।
तकरीबन 16 लाख कर्मचारियों वाली इंडियन रेलवे को दुनिया में सबसे ज्यादा नौकरी देने वाला संगठन माना जाता है, जबकि ऐसा है नहीं।
असलियतः फोर्ब्स की the employers with the largest workforces worldwide in 2015
लिस्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग दुनिया का सबसे बड़ा इम्प्लॉई बेस
है, क्योंकि उसके 32 लाख कर्मचारी है। दूसरे नंबर पर चीन सेना (पीपुल्स
लिबरेशन आर्मी) है, जबकि भारतीय रेलवे और भारतीय सेना इस फेहरिस्त में 8वें
और 9वें स्थान पर रखा गया है। रेलवे से ज्यादा कर्मचारी तो वॉलमार्ट के
हैं, जिसमें 21 लाख लोग काम करते हैं।
7 काशी नहीं है दुनिया का सबसे पुराना शहर
काशी या बनारस या वाराणसी, जो चाहें कह लें, को दुनिया का सबसे पुराना शहर बताया जाता है, जबकि ऐसा है नहीं।
असलियतः दुनिया के सबसे पुराने शहरों में एक दो नहीं,
बल्कि कई नाम हैं, जो बनारस से पहले बसे। इनमें सीरिया का दमिश्क, जेरिको,
अलेप्पो (सीरिया), एथेंस (ग्रीस) और येरुशलम जैसे कई शहर हैं।
8- इंडिया 1947 में हुआ धर्मनिरपेक्ष
हमेशा माना जाता है कि 1947 में भारतीय संविधान ने धर्मनिरपेक्षता को अपनाया गया।
असलियतः सच ये है कि 1976 में एक संविधान संशोधन के ज़रिए 'सेक्युलर' शब्द प्रस्तावना में जोड़ा गया।
9- हिंदी नहीं है इंडिया की ऑफिशियल लैंग्वेज
असलियतः गुजरात हाईकोर्ट ने 2010 में साफ कर दिया था
कि हिंदी को देश की ऑफिशियल लैंग्वेज मानने के लिए कोई रिकार्ड या
डिक्लेरेशन मौजूद नहीं है और न ही ऐसा कोई पुराना ऑर्डर है।
10- जन-गण-मन नहीं है सबसे बेस्ट
2014 में एक फर्जी ईमेल के जरिए यह झूठ फैल गया कि यूनेस्को ने जन-गण-मन को दुनिया का सबसे बेस्ट नेशनल एंथम माना है।
असलियतः जब ये झूठ फैला तो यूनेस्को ने सफाई भी दी-
'यूनेस्को दुनियाभर के देशों का प्रतिनिधित्व करता है और इस तरह से किसी को
कमतर या बेहतर आंकना उसका काम नहीं है। यूनेस्को के लिए सभी देश बराबर हैं
और उनके एंथम भी।'
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