ये भारत के मराठा इतिहास की सबसे दिलचस्प प्रेम कहानी है। हालांकि,
एक-दूसरे से मिलने से लेकर मौत तक, इतिहास में दोनों के बारे में कई तरह की
बातें हैं। लेकिन सभी कहानियों में एक बात समान है। वह है इन दोनों के बीच
की बेपनाह मोहब्बत। जी हां, यह कहानी बाजीराव-मस्तानी की ही है। इस प्रेम
कथा पर संजय लीला भंसाली फिल्म बन रही है। इसमें रणवीर सिंह, दीपिका
पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा का अभिनय है। इसी साल दिसंबर में प्रदर्शित होने
वाली फिल्म का ट्रेलर 16 जुलाई को लॉन्च किया गया।
बाजीराव की चिता पर सती हो गई थी मस्तानी, यूं खत्म हुई थी प्रेम कहानी
मराठा पेशवा बाजीराव की दूसरी पत्नी का नाम मस्तानी था। वे बुंदेलखंड
की थीं और उनका धर्म मुस्लिम था। वे इतनी खूबसूरत थी कि उन्हें सौन्दर्य
साम्राज्ञी भी कहा जाता था। उन्हें बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल की बेटी
माना जाता है। महाराजा की पारसी-मुस्लिम पत्नी रुहानी बाई मस्तानी उनकी मां
थी। 28 अप्रैल 1740 को मराठा पेशवा बाजीराव का रावेर में बीमारी के कारण
निधन हुआ था। उस दौरान उनसे प्रेम करने वाली मस्तानी भी पेशवा की चिता पर
सती हो गई थी। हालांकि, मस्तानी के जीवन और मृत्यु को लेकर बहुत से तर्क
दिए जाते हैं।
छत्रसाल की मदद के लिए बुंदेलखंड आए थे पेशवा, यहीं मिली थी मस्तानी
दिसंबर 1728 में मुग़ल सूबेदार मोहम्मद खान बंगश बुंदेलखंड पर हमला करने की फिराक में था। महाराजा छत्रसाल को यह पता था कि वे इस हमले का सामना नहीं कर सकते। इस वजह से छत्रसाल बहुत चिंतित थे और उन्होंने बाजीराव को एक भावुक पत्र लिखा। पत्र मिलते ही बाजीराव अपने मराठा दस्ते के साथ बुंदेलखंड पहुंच गए। छत्रसाल की सेना के साथ मिलकर बाजीराव की फ़ौज ने मोहम्मद शाह को मुंहतोड़ जवाब दिया। लड़ाई में बंगश की हार हुई। उस वक्त बंगश के बेटे कायम खान ने एक बड़ी फौज के सहारे पिता की मदद करनी चाही, लेकिन मराठा-बुंदेली सेना के जोरदार हमलों के आगे उसे भी हार का सामना करना पड़ा। इस लड़ाई में बंगश गिरफ्तार किया गया। उसे इस वादे पर छोड़ा गया कि वह फिर कभी बुंदेलखंड पर हमला नहीं करेगा।
दिसंबर 1728 में मुग़ल सूबेदार मोहम्मद खान बंगश बुंदेलखंड पर हमला करने की फिराक में था। महाराजा छत्रसाल को यह पता था कि वे इस हमले का सामना नहीं कर सकते। इस वजह से छत्रसाल बहुत चिंतित थे और उन्होंने बाजीराव को एक भावुक पत्र लिखा। पत्र मिलते ही बाजीराव अपने मराठा दस्ते के साथ बुंदेलखंड पहुंच गए। छत्रसाल की सेना के साथ मिलकर बाजीराव की फ़ौज ने मोहम्मद शाह को मुंहतोड़ जवाब दिया। लड़ाई में बंगश की हार हुई। उस वक्त बंगश के बेटे कायम खान ने एक बड़ी फौज के सहारे पिता की मदद करनी चाही, लेकिन मराठा-बुंदेली सेना के जोरदार हमलों के आगे उसे भी हार का सामना करना पड़ा। इस लड़ाई में बंगश गिरफ्तार किया गया। उसे इस वादे पर छोड़ा गया कि वह फिर कभी बुंदेलखंड पर हमला नहीं करेगा।
मौके पर मिले इस मदद से छत्रसाल, बाजीराव के आभारी हो गए थे। उन्होंने
बाजीराव को अपना तीसरा बेटा स्वीकार किया। इतना ही नहीं छत्रसाल ने अपने
राज्य के तीन टुकड़े कर एक हिस्सा बाजीराव को सौंप दिया। इसमें झांसी,
कालपी, सिरोंज, सागर और हिरदेनगर शामिल था। राज्य देने के अलावा महाराजा ने
अपनी बेटी मस्तानी का हाथ भी बाजीराव को दे दिया। कुछ लोगों का मानना है
कि मस्तानी कोई और नहीं बल्कि छत्रसाल के दरबार की एक 'राजनर्तकी' थी
क्या है विवाद, अब तक किसने लौटाए पुरस्कार और कैसे हुए बयान?
> गोमांस रखने के शक पर दादरी में एक शख्स की हत्या और कन्नड़ लेखक कलबुर्गी के मर्डर के बाद अवॉर्ड वापसी की शुरुआत हुई।
> 40 से ज्यादा लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए हैं।
> 13 इतिहासकार और कुछ वैज्ञानिकों ने भी राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाए हैं।
> दिबाकर बनर्जी जैसे 10 फिल्मकारों ने नेशनल अवॉर्ड लौटाए हैं।
> एक दिन पहले ही जानी-मानी अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा था, "देश में इन्टॉलरेंस बढ़ रहा है। हम सभी को सिम्बॉलिक जेस्चर के तौर पर अवॉर्ड लौटाने चाहिए।
> इतिहासकार इरफान हबीब ने तो यह बयान दे दिया कि इस्लामिक स्टेट और आरएसएस में ज्यादा फर्क नहीं है।
> इन सभी का आरोप है कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। मोदी सरकार कुछ नहीं कर रही। पीएम भी चुप्पी साधे हुए हैं।
> गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई मंत्रियों ने कहा है कि दादरी केस और कलबुर्गी की हत्या जैसे मामलों के लिए सीधे पीएम पर सवाल उठाना सही नहीं है