मंगलवार, 12 जनवरी 2016

भारत और PAK का था एक आर्मी चीफ, सरदार पटेल ने लगाई थी फटकार

फाइल फोटो- कश्मीर इनसेट में सरदार पटेल।

अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने पठान कबिलाइयों, पूर्व सैनिकों तथा ‘अवकाश पर गए‘ सैनिकों की टुकड़ी से जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर दिया।
ब्रिटिश थे भारत की थल सेना के अध्यक्ष...
यह एक अनोखा युद्ध था। यह एक ऐसा युद्ध था जिसमें दोनों देशों की सेनाओं का नेतृत्व तीसरे देश के सेनाध्यक्ष के हाथ में था। ब्रिटिश जनरल नए-नए बने देश भारत और पाकिस्तान की सेनाओं का नेतृत्व कर रहे थे। यहां तक कि भारत में कैबिनेट की डिफेंस कमेटी की अध्यक्षता लार्ड माउंटबेटन द्वारा की जा रही थी न कि प्रधानमंत्री नेहरू द्वारा। भारत पाकिस्तान से कैसे निपटे इसका फैसला उन ब्रिटिश अधिकारियों को लेना था जो दोनों सेनाओं के उच्च पदों पर थे।
भारतीय सेना के ब्रिटिश अधिकारी
अगस्त 1947 के बाद तीन ब्रिटिश अधिकारी भारतीय सेना में सेवारत थे। सेनाध्यक्ष के रूप में लॉकहार्ट 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1947 तक रहे इसके बाद बाऊचर एक जनवरी 1948 से 14 जनवरी 1949 और आर्मी कमांडर के रूप में रुसेल अगस्त 1947 से जनवरी 19 जनवरी 1948 तक जब करिअप्पा ने उनसे कार्यभार संभाला।
लॉकहार्ट नहीं था वफादार
उपरोक्त तीनों ब्रिटिश अधिकारियों में से लॉकहार्ट भारत के प्रति वफादार नहीं थे। महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 की दोपहर बाद भारत में विलय किया। तबके ब्रिटिश अधिकारियों ने कश्मीर जाने से मना कर दिया।
जब सरदार पटेल ने लगाई फटकार
तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और सेनाध्यक्षों ने अपने-अपने तर्क दिए। उनका कहना था कि हम कश्मीर में सेना नहीं भेज सकते। सरदार पटेल ने सबकी बात सुनी, अचानक बहुत तेज आवाज में उन्होंने सेनाध्यक्षों को फटकार लगाते हुए कहा कहा- आप लोग तैयारी कीजिए कल आपको एयरफोर्स के जहाज कश्मीर जाने के लिए तैयार मिलेंगे इससे हमारे सैनिक जाएंगे। किसी भी हालत में कश्मीर हाथ से नहीं जाना चाहिए।


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