मंगलवार, 3 नवंबर 2015

क्या है साईं बाबा का सच, क्या कह रहे हैं उनके विरोधी?

फाइल फोटो- साईं बाबा का पुराना चित्र।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं बाबा को को मुसलमान फकीर कहा है। विवादित पोस्टर से कई लोगों की भावनाएं आहत हुई तो कई सवाल भी खड़ी हुए हैं। साईं बाबा के बारे में बहुत भ्रम फैला है। वे हिन्दू थे या मुसलमान? क्या वे कबीर, नामदेव, पांडुरंग आदि के अवतार थे।
आचार्य चतुरसेन का उपन्यास 'सोमनाथ' में उन्होंने लिखा है कि मुगल और अंग्रेजों के शासनकाल में ऐसा अकसर होता था कि जासूसी या हिन्दू क्षेत्र की रेकी करने के लिए सूफी संतों के वेश में फकीरों की टोली को भेजा जाता था, जो गांव या शहर के बाहर डेरा डाल देती थी। इनका काम था सीमा पर डेरा डाल कर वहां के लोगों और राजाओं की ताकत का अंदाजा लगाना और प्रजा में विद्रोह भड़काना।
किसने कहा सबसे पहले साईं
> 'साई' शब्द फारसी का है जिसका अर्थ होता है 'संत'। उस काल में आमतौर पर भारत के पाकिस्तानी हिस्से में मुस्लिम संन्यासियों के लिए इस शब्द का प्रयोग होता था। शिर्डी में साईं सबसे पहले जिस मंदिर के बाहर आकर रुके थे उसके पुजारी ने उन्हें साईं कहकर ही संबोधित किया था। मंदिर के पुजारी को वे मुस्लिम फकीर ही नजर आए तभी तो उन्होंने उन्हें साईं कहकर पुकारा।
> साईं ने यह कभी नहीं कहा कि 'सबका मालिक एक'। साईं सच्चरित्र के अध्याय 4, 5, 7 में इस बात का उल्लेख है कि वे जीवनभर सिर्फ 'अल्लाह मालिक है' यही बोलते रहे। कुछ लोगों ने उनको हिन्दू संत बनाने के लिए यह झूठ प्रचारित किया कि वे 'सबका मालिक एक है' भी बोलते थे। यदि वे एकता की बात करते थे, तो कभी यह क्यों नहीं कहा कि 'राम मालिक है' या 'भगवान मालिक है।'
> कोई हिन्दू संत सिर पर कफन जैसा नहीं बांधता, ऐसा सिर्फ मुस्लिम फकीर ही बांधते हैं। जो पहनावा साईं का था, वह एक मुस्लिम फकीर का ही हो सकता है। हिन्दू धर्म में सिर पर सफेद कफन जैसा बांधना वर्जित है या तो जटा रखी जाती है या किसी भी प्रकार से सिर पर बाल नहीं होते।

साईं बाबा मस्जिद में क्यों रहे
> साईं बाबा ने रहने के लिए मस्जिद का ही चयन क्यों किया? वहां और भी स्थान थे, लेकिन वे जिंदगीभर मस्जिद में ही रहे। मस्जिद के अलावा भी तो शिर्डी में कई और स्थान थे, जहां वे रह सकते थे। मस्जिद ही क्यों? भले ही मंदिर में न रहते, तो नीम के वृक्ष के नीचे एक कुटिया ही बना लेते। उनके भक्त तो इसमें उनकी मदद कर ही देते।
> साईं सच्चरित्र के अनुसार, साईं बाबा पूजा-पाठ, ध्यान, प्राणायाम और योग के बारे में लोगों से कहते थे कि इसे करने की कोई जरूरत नहीं है। उनके इस प्रवचन से पता चलता है कि वे हिन्दू धर्म विरोधी थे। साईं बाबा का मिशन था- लोगों में एकेश्वरवाद के प्रति विश्वास पैदा करना। उन्हें कर्मकांड, ज्योतिष आदि से दूर रखना।
> मस्जिद से बर्तन मंगवाकर वे मौलवी से फातिहा पढ़ने के लिए कहते थे। इसके बाद ही भोजन की शुरुआत होती थी। उन्होंने कभी भी मस्जिद में गीता पाठ नहीं करवाया या भोजन कराने के पूर्व 'श्रीगणेश करो' ऐसा भी नहीं कहा। यदि वे हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात करते थे तो फिर दोनों ही धर्मों का सम्मान करना चाहिए था।

क्या अफगानिस्तान के थे साईं
> साईं को सभी यवन मानते थे। वे हिन्दुस्तान के नहीं, अफगानिस्तान के थे इसीलिए लोग उन्हें यवन का मुसलमान कहते थे। उनकी कद-काठी और डील-डौल यवनी ही था। साईं सच्चरित्र के अनुसार, एक बार साईं ने इसका जिक्र भी किया था। जो भी लोग उनसे मिलने जाते थे उन्हें मुस्लिम फकीर ही मानते थे, लेकिन उनके सिर पर लगे चंदन को देखकर लोग भ्रमित हो जाते थे।
> बाबा कोई धूनी नहीं रमाते थे जैसा कि नाथ पंथ के लोग करते हैं। ठंड से बचने के लिए बाबा एक स्थान पर लड़की इकट्ठी करके आग जलाते थे। उनके इस आग जलाने को लोगों ने धूनी रमाना समझा। चूंकि बाबा के पास जाने वाले लोग चाहते थे कि बाबा हमें कुछ न कुछ दे तो वे धूनी की राख को ही लोगों को प्रसाद के रूप में दे देते थे। यदि प्रसाद देना ही होता था तो वे अपने भक्तों को मांस मिला हुआ नमकीन चावल देते थे।
> आजकल साईं बाबा को पुस्तकों और लेखों के माध्यम से ब्राह्मण कुल में जन्म लेने की कहानी को प्रचारित किया जा रहा है। क्या कोई ब्राह्मण मस्जिद में रहना पसंद करेगा?

क्यों डराया था गांव वालों को
> साईं के समय दो बार अकाल पड़ा लेकिन साईं उस वक्त अपने भक्तों के लिए कुछ नहीं कर पाए। एक बार प्लेग फैला तो उन्होंने गांव के सभी लोगों को गांव से बाहर जाने के लिए मना किया, क्योंकि कोई जाकर वापस आएगा तो वह भी इस गांव में प्लेग फैला देता, तो उन्होंने लोगों में डर भर दिया कि जो भी मेरे द्वारा खींची गई लकीर के बाहर जाएगा, वह मर जाएगा। इस डर के कारण भोली-भाली जनता गांव से बाहर नहीं गई और लोगों ने इसे चमत्कार के रूप में प्रचारित किया कि साईं ने गांव की प्लेग से रक्षा की। प्लेग उनके गांव में नहीं आ सका। साईं के पास कई ऐसे लोग आते जाते थे, जो उन्हें बाहर की दुनिया का हालचाल बता देते थे।
> साईं का जन्म 1830 में हुआ, पर इन्होंने आजादी की लड़ाई में भारतीयों की मदद करना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि वे भारतीय नहीं थे। वे अंग्रेजों के जासूस थे। अफगानिस्तानी पंडारियों के समाज से थे और उन्हीं के साथ उनके पिता भारत आए थे। उनके पिता का नाम बहरुद्दीन था और उनका नाम चांद मियां।
> साईं के विरोधी साईं चरित में उल्लेखित घटना का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि 1936 में हरि विनायक साठे (एक साईं भक्त) ने अपने साक्षात्कार में नरसिम्हा स्वामी को बोला था कि बाबा किसी भी हिन्दू देवी-देवता या स्वयं की पूजा मस्जिद में नहीं करने देते थे, न ही मस्जिद में किसी देवता के चित्र वगैरह लगाने देते।

क्यों बोलते थे अल्लाह मालिक
> साईं सच्चरित्र साईं भक्तों और शिर्डी साईं संस्थान द्वारा बताई गई साईं के बारे में सबसे उचित पुस्तक है। पुस्तक के पेज नंबर 17, 28, 29, 40, 58, 78, 120, 150, 174 और 183 पर साईं ने 'अल्लाह मालिक' बोला, ऐसा लिखा है। पूरी पुस्तक में साईं ने एक बार भी किसी हिन्दू देवी-देवता का नाम नहीं बोला और न ही कहीं 'सबका मालिक एक' बोला। साईं भक्त बताएं कि जो बात साईं ने अपने मुंह से कभी कही ही नहीं, उसे साईं के नाम पर क्यों प्रचारित किया जा रहा है?
साईं को राम से जोड़ने की साजिश : 12 अगस्त 1997 को गुलशन कुमार की हत्या के ठीक 6 महीने बाद 1998 में साईं नाम के एक नए भगवान का अवतरण हुआ। इसके कुछ समय बाद 28 मई 1999 में 'बीवी नंबर 1' फिल्म आई जिसमें साईं के साथ पहली बार राम को जोड़कर 'ॐ साईं राम' गाना बनाया था।
> बाबा बाजार से खाद्य सामग्री में आटा, दाल, चावल, मिर्च, मसाला, मटन आदि सब मंगाते थे और इसके लिए वे किसी पर निर्भर नहीं रहे थे। भिक्षा मांगना तो उनका ढोंग था। बाबा के पास घोड़ा भी था। शिर्डी के अमीर हिन्दुओं ने उनके लिए सभी तरह की सुविधाएं जुटा दी थीं। उनके कहने पर ही कृष्णा माई गरीबों को भोजन करवाती थीं, मस्जिद में साफ-सफाई करती थीं और सभी तरह की देख-रेख का कार्य करती थीं।

मेघा से क्या कहा साईं बाबा ने
> साईं मेघा की ओर देखकर कहने लगे, 'तुम तो एक उच्च कुलीन ब्राह्मण हो और मैं बस निम्न जाति का यवन (मुसलमान) इसलिए तुम्हारी जाति भ्रष्ट हो जाएगी इसलिए तुम यहां से बाहर निकलो। -साई सच्चरित्र।-(अध्याय 28)
> एक एकादशी को उन्होंने पैसे देकर केलकर को मांस खरीदने लाने को कहा। -साईं सच्चरित्र (अध्याय 38)
> बाबा ने एक ब्राह्मण को बलपूर्वक बिरयानी चखने को कहा। -साईं सच्चरित्र (अध्याय 38)
> साईं सच्चरित्र अनुसार साईं बाबा गुस्से में आते थे और गालियां भी बकते थे। ज्यादा क्रोधित होने पर वे अपने भक्तों को पीट भी देते थे। बाबा कभी पत्‍थर मारते और कभी गालियां देते। -पढ़ें 6, 10, 23 और 41 साईं सच्चरित्र अध्याय।
> बाबा ने स्वयं कभी उपवास नहीं किया और न ही उन्होंने किसी को करने दिया। साईं सच्चरित्र (अध्याय 32)
> 'मुझे इस झंझट से दूर ही रहने दो। मैं तो एक फकीर हूं, मुझे गंगाजल से क्या प्रयोजन?- साई सच्चरित्र (अध्याय 28)


और क्या कह रहे हैं साईं विरोधी
साईं विरोधी कहते हैं कि साईं अफगानिस्तान का एक पिंडारी लुटेरा था। इसके लिए वे एक कहानी बताते हैं कि औरंगजेब की मौत के बाद मुगल साम्राज्य खत्म-सा हो गया था केवल दिल्ली उनके अधीन थी। मराठों के वीर सपूतों ने एक तरह से हिन्दू साम्राज्य की नींव रख ही दी थी, ऐसे समय में मराठाओं को बदनाम करके उनके इलाकों में लूटपाट करने का काम ये पिंडारी करते थे। जब अंग्रेज आए तो उन्होंने पिंडारियों को मार-मारकर खत्म करना शुरू किया। इस खात्मे के अभियान के चलते कई पिंडारी अंग्रेजों के जासूस बन गए थे।

क्या है झांसी की रानी का संबंध
साईं के विरोधी कहते हैं कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेना में 500 पिंडारी अफगान पठान सैनिक थे। उनमें से कुछ सैनिकों को अंग्रेजों ने रिश्वत देकर मिला लिया था। उन्होंने ही झांसी की रानी के किले के राज अंग्रेजों को बताए थे। युद्ध के मैदान से रानी जिस रास्ते पर घोड़े के साथ निकल पड़ीं, उसका रास्ता इन्हीं पिंडारी पठानों ने अंग्रेजों को बताया। अंत में पीछा करने वाले अंग्रेजों के साथ 5 पिंडारी पठान भी थे। उनमें से एक शिर्डी के कथित साईं बाबा के पिता थे जिसे बाद में झांसी छोड़कर महाराष्ट्र में छिपना पड़ा था। उसका नाम था बहरुद्दीन। उसी पिंडारी पठान भगोड़े सैनिक का बेटा यह शिर्डी का साईं है, जो वेश्या से पैदा हुआ और और जिसका नाम चांद मियां था।

क्या हुआ था 1857 में
1857 के दौरान हिन्दुस्तान में हिन्दू और मुसलमानों के बीच अंग्रेजों ने फूट डालने की नीति के तहत कार्य करना शुरू कर दिया था। इस क्रांति के असफल होने का कारण यही था कि कुछ हिन्दू और मुसलमान अंग्रेजों की चाल में आकर उनके लिए काम करते थे। बंगाल में भी हिन्दू-मुस्लिम संतों के बीच फूट डालने के कार्य को अंजाम दिया गया। इस दौर में कट्टर मुसलमान और पाकिस्तान का सपना देखने वाले मुसलमान अंग्रेजों के साथ थे।

क्या कह रह हैं साईं के पिता के बारे में
साईं के पिता जो एक पिंडारी ही थे, उनका मुख्य काम था अफगानिस्तान से भारत के राज्यों में लूटपाट करना। एक बार लूटपाट करते-करते वे महाराष्ट्र के अहमदनगर पहुंचे, जहां वे एक वेश्या के घर में रुक गए। फिर वे उसी के पास रहने लगे। कुछ समय बाद उस वेश्या से उन्हें एक लड़का और एक लड़की पैदा हुई। लड़के का नाम उन्होंने चांद मियां रखा। लड़के को लेकर वे अफगानिस्तान चले गए। लड़की को वेश्या के पास ही छोड़ गए। अफगानिस्तान उस काल में इस्लामिक ट्रेनिंग सेंटर था, जहां लूटपाट, जिहाद और धर्मांतरण करने के तरीके सिखाए जाते थे।

कौन थे चांद मिया
उस समय अंग्रेज पिंडारियों की जबरदस्त धरपकड़ कर रहे थे इसलिए बहरुद्दीन भेस बदलकर लूटपाट करता और उसने अपने संदेशवाहक के लिए अपने बेटे चांद मियां (साईं) को भी ट्रेंड कर दिया था। चांद मियां चादर फैलाकर भीख मांगता था। चांद मियां चादर पर यहां के हाल लिख देता था और उसे नीचे से सिलकर अफगानिस्तान भेज देता था। इससे जिहादियों को मराठाओं और अंग्रेजों की गतिविधि के बारे में पता चल जाता था।

किसे कहते थे यवनी
यह साईं अफगानिस्तान का एक पिंडारी था जिसे लोग यवनी कहकर पुकारते थे। यह पहले हिन्दुओं के गांव में फकीरों के भेष में रहकर चोरी-चकारी करने के लिए कुख्यात था। यह हरे रंग की चादर फैलाकर भीख मांगता था और उसे काबुल भेज देता था। किसी पीर की मजार पर चढ़ाने के लिए उसी चादर के भीतर वह मराठा फौज और हिन्दू धनवानों के बारे में सूचनाएं अन्य पिंडारियों को भेजता था ताकि वे सेंधमारी कर सकें। इसकी चादर एक बार एक अंग्रेज ने पकड़ ली थी और उस पर लिखी गुप्त सुचनाओं को जान लिया था।

क्या चांद मिया जेल से छूटा था
1857 की क्रांति का समय अंग्रेजों के लिए विकट समय था। ऐसे में चांद मियां अंग्रेजों के हत्थे चढ़ गए। अहमदनगर में पहली बार साईं की फोटो ली गई थी। अपराधियों की पहले भी फोटो ली जाती थी। यही चांद मियां 8 साल बाद जेल से छुटकर कुछ दिन बाद एक बारात के माध्यम से शिर्डी पंहुचा और वहां के सुलेमानी लोगों से मिला जिनका असली काम था गैर-मुसलमानों के बीच रहकर चुपचाप इस्लाम को बढ़ाना। इस मुलाकात के बाद साईं पुन: बारातियों के साथ चले गए। कुछ दिन बाद चांद मियां शिर्डी पधारे और यहीं उन्होंने अल-तकिया का ज्ञान लिया। मस्जिद को जान-बूझकर एक हिन्दू नाम दिया गया और उसके वहां ठहराने का पूरा प्रबंध सुलेमानी मुसलमानों ने किया।

किसने किया प्रचारित
एक षड्यंत्र के तहत चांद मियां को चमत्कारिक फकीर के रूप में प्रचारित किया गया और गांव की भोली-भाली हिन्दू जनता उसके झांसे में आने लगी। चांद मियां कई तरह के जादू-टोने और जड़ी-बूटियों का जानकार था इसलिए धीरे-धीरे गांव में लोग उसको मानने लगे। बाद में मंडलियों द्वारा उसके चमत्कारों का मुंबई में भी प्रचार-प्रसार किया गया जिसके चलते धनवान लोग भी उसके संपर्क में आने लगे।

क्या पाठ पढ़ाया
साईं ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की बातें करके मराठाओं को उनके ही असली दुश्मनों से एकता निभाने का पाठ पढ़ाया। यह मराठाओं की शक्ति को कमजोर करने का षड्यंत्र था। सिर्फ साईं ही नहीं, ऐसे कई ढोंगी संत उस काल में यही कार्य पूरे महाराष्ट्र में कर रहे थे। मराठाओं की शक्ति से सभी भयभीत हो गए थे तो उन्होंने 'छल' का उपयोग शुरू कर दिया था

सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं साईं विरोधी
फेसबुक पर साईं के विरोधियों के कई पेज बने हुए हैं जिसमें साईं बाबा के बारे में आपत्तिजनक बातें और फोटो मिल जाएंगे। साईं विरोधियों की इस कहानी में कितनी सच्चाई है यह कहना मुश्किल है। हालांकि, इस काहानी का कोई आधार नहीं है, क्योंकि उन्होंने साईं सच्चरित्र की जिन बातों का उल्लेख किया है उसे संदर्भ के साथ पढ़ने पर ही इसका खुलासा होगा। उन्होंने संदर्भ हटाकर इस तरह की बातें प्रचारित कीं जिसके चलते लोगों में भ्रम फैल रहा है। इसलिए यहां यही कहना होगा कि जो लोग साईं बाबा के बारे में कम जानकारी रखते हैं उन्हें साई सच्चरित्र और साईं लीला पढ़ना चाहिए।

बाप-बाप होता है और बेटा-बेटा

धोनी-कोहली में बेहतर कप्तान कौन? कपिल बोले- बाप-बाप होता है और बेटा-बेटा

शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

सहवाग का सवाल

क्या देश के लिए 13 साल खेल चुके प्लेयर को फेयरवेल का भी हक नहीं?

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2015


Today In History. What Happened This Day In History

A chronological timetable of historical events that occurred on this day in history. Historical facts of the day in the areas of military, politics, science, music, sports, arts, entertainment and more. Discover what happened today in history.
February 14
Happy Valentine's Day!
Today is St. Valentine's Day, the feast day of two Christian martyrs named Valentine: one a priest and physician, the other the Bishop of Terni. Both are purported to have been beheaded on this day. The custom of sending handmade 'valentines' to one's beloved became popular during the 17th century and was first commercialized in the United States in the 1840s.

13492,000 Jews are burned at the stake in Strasbourg, Germany.
1400The deposed Richard II is murdered in Pontefract Castle in Yorkshire.
1549Maximilian II, brother of the Emperor Charles V, is recognized as the future king of Bohemia.
1779American Loyalists are defeated by Patriots at Kettle Creek, Ga.
1797The Spanish fleet is destroyed by the British under Admiral Jervis (with Nelson in support) at the battle of Cape St. Vincent, off Portugal.
1848James Polk becomes the first U.S. President to be photographed in office by Matthew Brady.
1859Oregon is admitted as the thirty-third state.
1870Esther Morris becomes the world's first female justice of the peace.
1876Rival inventors Elisha Gray and Alexander Graham Bell both apply for patents for the telephone.
1900General Roberts invades South Africa's Orange Free State with 20,000 British troops.
1904The "Missouri Kid" is captured in Kansas.
1912Arizona becomes the 48th state in the Union.
1915Kaiser Wilhelm II invites the U.S. Ambassador to Berlin in order to confer on the war.
1918Warsaw demonstrators protest the transfer of Polish territory to the Ukraine.
1920The League of Women Voters is formed in Chicago in celebration of the imminent ratification of the 19th Amendment, giving women the right to vote.
1924Thomas Watson founds International Business Machines Corp.
1929Chicago gang war between Al Capone and George "Bugs" Moran culminates with several Moran confederates being gunned down in the St. Valentine's Day Massacre.
1939Germany launches the battleship Bismark.
1940Britain announces that all merchant ships will be armed.
1942Japanese paratroopers attack Sumatra. Aidan MacCarthy's RAF unit flew to Palembang, in eastern Sumatra, where 30 Royal Australian Air Force Lockheed A-28 Hudson bombers were waiting.
1945800 Allied aircraft firebomb the German city of Dresden. Smaller followup bombing raids last until April with a total death toll of between 35,000 to 130,000 civillians.
1945The siege of Budapest ends as the Soviets take the city. Only 785 German and Hungarian soldiers managed to escape.
1949The United States charges the Soviet Union with interning up to 14 million in labor camps.
1955A Jewish couple loses their fight to adopt Catholic twins as the U.S. Supreme Court refuses to rule on state law.
1957The Georgia state senate outlaws interracial athletics.
1965Malcolm X's home is firebombed. No injuries are reported.
1971Moscow publicizes a new five-year plan geared to expanding consumer production.
1973The United States and Hanoi set up a group to channel reconstruction aid directly to Hanoi.
1979Armed guerrillas attack the U.S. embassy in Tehran.
1985Vietnamese troops surround the main Khmer Rouge base at Phnom Malai.
1989Iranian leader Ayatollah Ruholla Khomeini charges that Salman Rushdie's novel, The Satanic Verses, is blasphemous and issues an edict (fatwa) calling on Muslims to kill Rushdie.
Born on February 14
1760Richard Allen, first black ordained by a Methodist-Episcopal church.
1817Frederick Douglass, slave, and later, activist and author.
1819Christopher Latham Sholes, inventor of the first practical typewriter.
1845Quinton Hogg, English philanthropist.
1859George Washington Gale Ferris, inventor of the Ferris Wheel.
1894Jack Benny, comedian, radio and television performer…and violinist.
1894Mary Lucinda Cardwell Dawson, founded the National Negro Opera Company (NNOC) and was appointed to President John F. Kennedy's National Committee on Music.

जब अटल बिहारी ने दाउद को............

जब अटल बिहारी ने दाउद को मारने के लिए छोटा राजन की मदद ली थी----

दाऊद इब्राहीम की बेटी माहरूख शेख का निकाह पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनैद के साथ 9 मई 2005 को मक्का में होने जा रहा था. निकाह की खबर बेहद गोपनीय रखी गई थी. बस गिनती भर लोगों को इसकी खबर थी. 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के बाद दाऊद लगातार दुबई और पाकिस्तान के बीच ही घूम रहा था. पर 2000 के मध्य में संयुक्त राष्ट्र ने जैसे ही दाऊद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया, पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव पड़ने लगा. इसी के बाद से दाऊद के मुवमेंट को लेकर बेहद गोपनीयता बरती जाने लगी थी.
मक्का में दाऊद की बेटी के निकाह की खबर नई दिल्ली तक पहुंच चुकी थी. अचानक रॉ और आईबी के कान खड़े हो गए. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल बस पांच महीने पहले ही जनवरी 2005 में आईबी यानी खुफिया ब्यूरो के निदेशक पद से रिटायर हुए थे.
निकाह के बाद अब दावत-ए-वलीमा यानी रिसेप्शन की बारी थी. जावेद मियांदाद और दाऊद इब्राहीम वलीमा कराची में ही करना चाहते थे. पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसिय़ों को ये मंजूर नहीं था. उन्हें डर था कि इससे दाऊद की कराची में मौजूदगी का सबूत आम हो जाएगा. लिहाज़ा आखिर में तय हुआ कि वलीमा 23 जुलाई को दुबई के ग्रैंड हयात होटल में होगा. दुबई के ग्रैंड हयात होटल में वलीमा की खबर नई दिल्ली तक भी पहुंच चुकी थी. ऐसा पहली बार था जब भारतीय एजेंसियों को पक्के तौर पर पहले से मालूम चल चुका था कि दाऊद किस तारीख को, किस दिन, कितने बजे कहां होगा. आईबी को पता था कि दाऊद को मारने का इससे बेहतर मौका नहीं मिलेगा. क्योंकि ये तय था कि दाऊद अपनी बेटी के वलीमे में जरूर आएगा.
इसी के बाद आईबी ने दाऊद को दुबई में मारने का प्लान तैयार किया. नई दिल्ली की भी इसमें रज़ामंदी थी. पर नई दिल्ली सीधे तौर पर ऑपरेशन दाऊद से ज़ुड़ना नहीं चाहती थी. लिहाज़ा इसी के बाद तय हुआ कि ऑपरेशन के लिए कमांडो भेजने की बजाए छोटा_राजन गैंग के शार्प शूटर को दुबई भेजा जाए. इस ऑपरेशन का इंचार्ज किसी और को नहीं बल्कि अजित डोवाल को बनाया गया. 1993 के मुंबई ब्लास्ट के बाद छोटा राजन, दाऊद और उसकी डी-कंपनी से अलग हो चुका था. राजन अब खुद को हिंदू डॉन के तौर पर प्रचारित कर दाऊद का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका था. आईबी की नज़र मे दुश्मन का दुश्मन दोस्त था.
प्लानिंग के तहत ऑपरेशन दाऊद के लिए छोटा राजन ने अपने सबसे भरोसेमंद शार्पशूटर विक्की_मल्होत्रा को चुना. ये पश्चिम बंगाल के 24 परगना इलाके से भारत में दाखिल हुआ. भारत आने के बाद इसको एक खुफिया ठिकाने पर ट्रेनिंग दी गई और दाऊद को मारने की पूरी प्लानिंग बनाई गई. तय हुआ कि दाऊद को 23 जुलाई 2005 को ग्रैंड हयात में ही मारा जाएगा. इसके लिए विक्की मल्होज्ञा का फर्जी ट्रेवल डाक्यूमेंट्स तैयार किए गए. साथ ही दुबई की फ्लाइट की टिकट भी बुक करा दी गई. भारतीय खुफिया एजेंसी का ये अब तक का सबसे बड़ा और सबसे अहम ऑपरेशन था. अब तक सब कुछ प्लानिंग के हिसाब से ही चल रहा था. बस अब शूटर को दुबई के लिए रवाना किया जाना था. पर तभी मुंबई से एक बुरी खबर आती है.
आईबी का ऑपरेशन बेहद गोपनीय था. नई दिल्ली के अलावा एजेंसी के गिने-चुने लोगों को ही इसकी भनक थी. पर ऐन ऑपरेशन दाऊद से पहले मुंबई पुलिस को राजन गैंग के शूटर विक्की मलहोत्रा की भारत में मौजूदगी की खबर लग जाती है. पूर्व गृह सचिव आरके सिंह की मानें तो मंबई पुलिस और कांग्रेस पार्टी में में दाऊद के कई मुखबिर हैं जो दाऊद के लिए काम करते हैं. उन्होंने ही पूरे ऑपरेशन को नाकाम करने के लिए जानबूझ कर अड़ंगा लगा दिया.
मुंबई क्राइम ब्रांच के डिप्‍टी कमिश्नर ऑफ पुलिस धनंजय_कमलाकर को उस समय की आतंकी पार्टी कांग्रेस सरकार ने इस हिदायत के साथ दिल्ली भेज दिया कि किसी भी कीमत पर विक्की मल्होत्रा को गिरफ्तार कर मुबई ले आओ. कमलाकर ने बाद में बताया कि उन्हें कहा गया था कि वह शूटर भारत एक बड़े नेता या बड़े बिजनेसमैन को मारने आया हैं.
इधऱ आईबी मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई से बेखबर प्लान को अंजाम तक पहुंचाने की आखिरी तैयारी में जुटी थी. एक शाम अजित डोवाल राजन गैंग के शूटर को नई दिल्ली के एक होटल में आखिरी ब्रीफिंग दे रहे थे. होटल ग्रैंड_हयात के ब्लू प्रिंट के साथ ये तय हो रहा था कि वौ कौन सी सबसे बेहतर जगह है जहां शूटर को तैनात किया जाए. मगर तभी उसी वक्त होटल में धनंजय कमलाकर की टीम पहुंच जाती है और विक्की मल्होत्रा को गिरफ्तार कर लेती है.
अजित डोवाल भी मुंबई पुलिस की इस हरकत से सकते में आ जाते हैं. वो गुस्सा भी होते हैं. समझाते भी हैं. मगर कांग्रेस नामक आतंकी संगठन के आदेश से मजबूर कमलाकर अपनी जिद पर अड़े रहते हैं और आखिर में विक्की मल्होत्रा को गिरफ्तार कर मुंबई ले जाते हैं.
और इस तरह दाऊद को मारने का भारतीय खुफिया एजेंसी का पहला और सबसे बड़ा ऑपरेशऩ सिर्फ इसलिए फेल जाता है क्योंकि उस समय महाराष्ट्र की सरकार कांग्रेस नही बल्कि उनका आका दाऊद इब्राहिम चला रहा था...!!

कचरा बीनने वाली की बेटी बनी ब्यूटी क्वीन, कदमों में ताज रख कहा- थैंक यू


शंकराचार्य स्वरूपानंद ने रिलीज किया साईं बाबा पर हमला करते हनुमानजी का पोस्टर