मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

नेत्रहीन दूल्हे को मिली दुल्हन, शादी की खुशी में गाया गाना

शादी के दौरान दीपमाला और  पांचाराम।
संगीत टीचर पांचाराम। नेत्रहीन। जीवन के सफर में साथी की तलाश पूरी हुई और वे दृष्टिहीन दीपमाला के साथ रिश्तों की डोर में बंध गए। रविवार को आर्य समाज मंदिर में पूरे रीति रिवाज के साथ उनका विवाह हुआ।
दूल्हे ने गाना भी सुनाया
दीपमाला ने संगीत का कोर्स पूरा किया है। शादी के बाद दूल्हा खुश था। उनसे जब हारमोनियम देकर गीत गाने का आग्रह किया तो उन्होंने लोगों को निराश नहीं किया। 'आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके, मेरे दिल में यूं ही रहना तुम बहार बनके' सुनाया। दुल्हन ने भी सुर से सुर मिलाए। इस पर लोगों ने खूब तालियां बजाई। जब वंस मोर की फरमाइश हुई तो दूल्हे ने प्रस्तुति दी...ना कजरे की धार...ना मोतियों का हार...तुम कितनी सुंदर हो...।
खुशी के माहौल में शादी
खुशी के माहौल में यह विवाह संपन्न हुआ। आर्य समाज के प्रधान गजेंद्र के आवास पर दूल्हा-दुल्हन को सजाया-संवारा गया। लोगों ने बर्तन, साड़ियां और अन्य उपहार देकर नव दंपती को आशीर्वाद दिया। समारोह में नेत्रहीन स्कूल की संचालक सहित उनके संगी-साथी और दूसरे लोग मौजूद थे।

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