शनिवार, 5 दिसंबर 2015

दुनिया में पहली बार इस तरह से मिली भालू को मर्सी किलिंग

सोनू की अंतिम विदाई में उमड़ी भीड़।


कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में शनिवार दोपहर ​विश्व में पहली बार किसी भालू को क्लीनिकल प्रक्रिया से दया मृत्यु [मर्सी किलिंग] दी गई। भालू सोनू को मौत की नींद सुलाने की प्रक्रिया सुबह 11.22 बजे शरू हुई। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के काेलोरेडो और ग्लेशियर नेशनल पार्क में दो काले भालुओं की मर्सी कीलिंग की गई थी, लेकिन उन्हें मारने के लिए क्लीनिकल प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी, जबकि सोनू को दया मृत्यु देने के लिए वर्ल्ड सोसाइटी फॉर दी प्रोटेक्शन ऑफ एनिमल की गाइड लाइन को फॉलो किया गया।
- सुबह 10 बजे महामंडलेश्वर लक्ष्मणदास जी महाराज की मौजूदगी में 11 पंड़ितों ने सोनू को गीता के श्लोक सुनाए। इसके बाद गंगाजल और तुलसी दल दिया गया।
- सुबह साढ़े 11 बजे पिंजरे में मेकसेल्फ नामक केमिकल के तीन इंजेक्शन लगाए गए और फिर कुछ देर के लिए पिंजरा ढंक दिया गया।
- पूरी तरह से बेहोश होने के बाद सोनू को पिंजरे से निकालकर बाहर लाया गया।
- सलाइन के ज़रिए मैग्निशियम सल्फेट (मौत की दवाई) चढ़ाया गया।
- करीब एक घंटे बाद सोनू की धड़कने थम गईं।
- इसके बाद भालू सोनू का पीएम किया गया और फिर उसे जू में ही दफना दिया गया।
- गौरतलब है कि पिछले दो सालों से लकवे के कारण सोनू के शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं कर रहा था और उसे असहनीय दर्द बना रहता था।

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